
Urea in Animal Feed : दूध में पानी, डिटर्जेंट और सिंथेटिक केमिकल्स की मिलावट के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन अब मिलावट का खेल पशुओं के चारे तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल पशुओं की सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल ही में राजस्थान में पशुआहार में Urea in Animal Feed तय मानकों से अधिक यूरिया मिलाने के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
High urea milk side effects in humans जानकारों के अनुसार पशुआहार में अधिकतम एक प्रतिशत तक फीड ग्रेड यूरिया मिलाने की अनुमति है, लेकिन कई मामलों में इसकी मात्रा 1.5 प्रतिशत से लेकर 4 प्रतिशत तक पाई गई है। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर पशुओं के लिए निर्धारित फीड ग्रेड यूरिया की बजाय निम्न गुणवत्ता वाले इंडस्ट्रियल यूरिया का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा चारा खाने वाले पशुओं के दूध में यूरिया की मात्रा बढ़ सकती है, जो इंसानों में लिवर और किडनी से जुड़ी गंभीर High urea milk side effects in humans समस्याओं का कारण बन सकती है। हाल ही में राजस्थान में सामने आए मामलों ने पशुआहार की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पाया गया कि कुछ निर्माता और विक्रेता पशुओं के चारे में निर्धारित सीमा से अधिक यूरिया मिला रहे हैं। इसके अलावा कई बार खराब गुणवत्ता वाले अनाज, भूसी, कृषि अपशिष्ट और अन्य सस्ते पदार्थों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे पशुओं को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और उनकी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। Urea in Animal Feed
पशुआहार में यूरिया क्यों मिलाया जाता है? : Urea in Animal Feed
High urea milk side effects in humans विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया पूरी तरह प्रतिबंधित पदार्थ नहीं है। सीमित मात्रा में फीड ग्रेड यूरिया का उपयोग पशुओं के लिए नॉन-प्रोटीन नाइट्रोजन स्रोत के रूप में किया जाता है। गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले पशुओं के पेट में मौजूद सूक्ष्म जीव इसे प्रोटीन में बदलने में मदद करते हैं, जिससे चारे की पोषण क्षमता बढ़ती है और लागत कम होती है। हालांकि समस्या तब पैदा होती है, जब निर्धारित मात्रा से अधिक यूरिया या पशुओं के लिए अनुपयुक्त इंडस्ट्रियल यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम रूप से प्रोटीन की मात्रा अधिक दिखाना और कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना होता है।

फीड ग्रेड यूरिया और इंडस्ट्रियल यूरिया में क्या है अंतर?
फीड ग्रेड यूरिया विशेष रूप से पशुओं के लिए तैयार किया जाता है। इसमें हानिकारक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप होती है, इसलिए सीमित मात्रा में इसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है। दूसरी ओर, इंडस्ट्रियल यूरिया का उपयोग रसायन उद्योग, प्लास्टिक, खाद, रेजिन और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। इसमें कई ऐसे रासायनिक तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो पशुओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
ज्यादा यूरिया वाला चारा पशुओं के लिए कितना खतरनाक?
How to detect urea in milk at home : पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अधिक यूरिया युक्त चारा खाने से गाय और भैंसों में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है, भूख कम हो सकती है, दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है और कई मामलों में यूरिया विषाक्तता के कारण पशु की जान तक जा सकती है। इसके अलावा पशुओं में कमजोरी, शरीर में कंपन, सांस लेने में दिक्कत और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।
क्या दूध में भी बढ़ सकती है यूरिया की मात्रा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशु लंबे समय तक अधिक यूरिया वाला चारा खाता है तो उसके शरीर में नाइट्रोजन और यूरिया का स्तर बढ़ सकता है। इसका असर दूध की गुणवत्ता पर भी पड़ता है और दूध में यूरिया की मात्रा सामान्य से अधिक हो सकती है। हालांकि केवल दूध को देखकर यह पता लगाना संभव नहीं है कि उसमें यूरिया की मात्रा अधिक है या नहीं। इसकी पुष्टि केवल प्रयोगशाला जांच या विशेष टेस्ट किट के माध्यम से ही की जा सकती है।
हाई यूरिया वाला दूध पीने से क्या हो सकते हैं खतरे?
Side effects of urea on skin : डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक दूषित दूध का सेवन करने से शरीर पर कई दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे पाचन संबंधी समस्याएं, उल्टी, दस्त, कमजोरी और शरीर में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके अलावा लगातार ऐसे दूध का सेवन करने से किडनी और लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे इन अंगों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है हाई यूरिया वाला दूध
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। इसलिए दूषित दूध का असर उन पर जल्दी दिखाई दे सकता है। इससे बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं, कमजोरी, कुपोषण, शारीरिक विकास में रुकावट और पोषण असंतुलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक हाई यूरिया वाले दूध का सेवन करने से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, किडनी और लिवर के मरीजों तथा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक बढ़ जाता है।
दूध उबालने से खत्म नहीं होता यूरिया
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि दूध को उबालने से उसमें मौजूद बैक्टीरिया तो नष्ट हो सकते हैं, लेकिन यूरिया जैसे घुलनशील रसायन समाप्त नहीं होते। इसलिए केवल दूध उबालना इस खतरे से बचाव का उपाय नहीं माना जा सकता। दूध हमेशा विश्वसनीय डेयरी या भरोसेमंद विक्रेता से ही खरीदें। पैकेट वाले दूध की एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता संबंधी जानकारी अवश्य जांचें। यदि दूध के स्वाद, रंग या गंध में कोई असामान्यता महसूस हो तो उसका सेवन करने से बचें और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच कराएं।
पशुपालकों को भी बरतनी चाहिए सावधानी
पशुपालकों को केवल प्रमाणित कंपनियों का पशुआहार खरीदना चाहिए। चारे की गुणवत्ता की जांच करते रहना चाहिए और संदिग्ध उत्पादों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे पशुओं की सेहत बेहतर बनी रहती है और दूध की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है। राज्य पशुपालन विभाग और संबंधित सरकारी प्रयोगशालाएं समय-समय पर पशुआहार के नमूने लेकर उनकी जांच करती हैं। यदि जांच में मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित निर्माता या विक्रेता के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और उत्पादन इकाई को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
कहां करें शिकायत?
FSSAI Milk Quality Complaint : यदि किसी व्यक्ति को दूध की गुणवत्ता पर संदेह हो तो वह स्थानीय फूड सेफ्टी अधिकारी या भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से शिकायत कर सकता है। इसके अलावा ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत के साथ दूध का नमूना, बिल और उपलब्ध अन्य जानकारी देने से जांच प्रक्रिया में मदद मिलती है।

















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