Advertisement

Water cooler safety tips : कूलर चलाते समय भूलकर भी न करें ये गलती! करंट लगने से जा सकती है जान

Water cooler safety tips

Water cooler safety tips : भीषण गर्मी में कूलर लाखों घरों की पहली पसंद होता है। यह कम खर्च में राहत देने वाला उपकरण है, लेकिन यदि इसकी देखभाल और उपयोग सही तरीके से न किया जाए तो यही कूलर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित एक धार्मिक परिसर में कूलर और मिस्ट फैन में करंट आने से एक युवक की मौत का मामला सामने आने के बाद कूलर की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार बिजली का करंट कूलर की बॉडी में आ गया था, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश कूलरों में पानी, मोटर, पंप, वायरिंग और अन्य विद्युत उपकरण एक साथ काम करते हैं। यदि इनमें से किसी भी हिस्से में खराबी आ जाए, अर्थिंग ठीक न हो या वायरिंग क्षतिग्रस्त हो जाए तो करंट पूरी बॉडी में फैल सकता है। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए हर परिवार के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कूलर में करंट क्यों आता है, कौन-सी गलतियां सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं और किन आसान सावधानियों को अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

कूलर में करंट क्यों आ सकता है?

Cooler Electric Shock : कूलर के अंदर लगातार पानी भरा रहता है। इसके साथ ही इसमें मोटर, वॉटर पंप, फैन, वायरिंग और अन्य इलेक्ट्रिकल पार्ट्स लगे होते हैं। यदि इनमें किसी भी हिस्से में खराबी आ जाए, वायर कट जाए, मोटर में लीकेज हो या अर्थिंग सही तरीके से काम न कर रही हो, तो बिजली का करंट कूलर की बाहरी बॉडी तक पहुंच सकता है। विशेष रूप से मेटल बॉडी वाले कूलर में यह जोखिम अधिक माना जाता है।

धातु (मेटल) बिजली का अच्छा चालक होती है। यदि वायरिंग में लीकेज हो जाए या मोटर में खराबी आ जाए, तो पूरा करंट कूलर की धातु वाली बॉडी में फैल सकता है। ऐसी स्थिति में गीले हाथ या बिना चप्पल के कूलर को छूना जानलेवा साबित हो सकता है।

प्लास्टिक बॉडी वाला कूलर क्यों ज्यादा सुरक्षित माना जाता है?

Electric Shock From Cooler : विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक बिजली का सुचालक नहीं होता। इसी वजह से तकनीकी खराबी होने पर प्लास्टिक बॉडी वाले कूलर के बाहरी हिस्से में करंट आने की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्लास्टिक कूलर पूरी तरह सुरक्षित है। इसकी भी समय-समय पर जांच और सर्विसिंग जरूरी है।

कूलर इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

सुरक्षा उपायक्यों जरूरी है
हमेशा चप्पल पहनकर कूलर में पानी भरेंकरंट लगने का खतरा कम होता है
गीले हाथों से स्विच न छुएंबिजली का झटका लग सकता है
अर्थिंग सही रखेंकरंट लीकेज से सुरक्षा मिलती है
क्षतिग्रस्त तार तुरंत बदलेंशॉर्ट सर्किट और करंट से बचाव
बच्चों को कूलर से दूर रखेंदुर्घटना की संभावना कम होती है

सर्विसिंग करते समय भूलकर भी न करें ये गलती

Metal Cooler Safety : कई लोग बिना बिजली बंद किए ही कूलर की सफाई या मरम्मत शुरू कर देते हैं। यही सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक गलती है।

1. सबसे पहले बिजली सप्लाई बंद करें

कूलर की सफाई, मरम्मत या पानी निकालने से पहले हमेशा उसका प्लग सॉकेट से निकाल दें।

सिर्फ स्विच ऑफ करना पर्याप्त नहीं है।

2. अंदर का पानी पूरी तरह निकाल दें

यदि आप कूलर के अंदर हाथ डालने वाले हैं तो पहले उसका पानी पूरी तरह खाली करें और कुछ समय तक सूखने दें।

3. चालू कूलर में हाथ बिल्कुल न डालें

कई लोग चलते हुए कूलर में—

  • घास ठीक करते हैं।
  • हनीकॉम्ब एडजस्ट करते हैं।
  • पानी की पाइप साफ करते हैं।

यह आदत बेहद खतरनाक हो सकती है क्योंकि मोटर उसी समय बिजली से जुड़ी होती है।

4. खुद मैकेनिक बनने की कोशिश न करें

यदि—

  • मोटर खराब हो,
  • पंप बंद हो,
  • वायरिंग जल गई हो,
  • स्पार्किंग हो रही हो,

तो खुद मरम्मत करने के बजाय प्रशिक्षित इलेक्ट्रिशियन या तकनीशियन की सहायता लें।

पुराने कूलर में इन चीजों की नियमित जांच करें

जांच करने वाली चीजकब जांचें
बिजली की वायरिंगहर सीजन शुरू होने से पहले
प्लग और सॉकेटमहीने में एक बार
मोटरजरूरत पड़ने पर
वॉटर पंपनियमित अंतराल पर
अर्थिंगसाल में कम से कम एक बार

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

Cooler Maintenance Tips : यदि कूलर में इनमें से कोई भी समस्या दिखाई दे तो तुरंत उसका उपयोग बंद कर दें—

  • कूलर छूने पर हल्का झटका महसूस होना।
  • मोटर से जलने जैसी गंध आना।
  • स्पार्किंग होना।
  • तार गर्म होना।
  • बार-बार फ्यूज उड़ना।
  • पानी में बिजली जैसा कंपन महसूस होना।

करंट से बचने के लिए ये आदतें अपनाएं

  • ISI मार्क वाले कूलर का उपयोग करें।
  • अच्छी गुणवत्ता के प्लग और वायर लगवाएं।
  • नियमित सर्विसिंग कराएं।
  • खुले तारों को तुरंत बदलें।
  • वाटरप्रूफ इंसुलेशन टेप का ही उपयोग करें।
  • कूलर को हमेशा समतल और सूखी जगह पर रखें।
  • एक्सटेंशन बोर्ड के बजाय सुरक्षित सॉकेट का उपयोग करें।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि कूलर जितना जरूरी है, उसकी सुरक्षित देखभाल उससे कहीं अधिक जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही बिजली का बड़ा हादसा बन सकती है। नियमित मेंटेनेंस, अच्छी अर्थिंग, सुरक्षित वायरिंग और सावधानीपूर्वक उपयोग से ऐसे हादसों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *