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Crude Oil Price Today : कच्चा तेल 72 डॉलर पर आया, अब कब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए पूरी टाइमलाइन

Crude Oil Price Today

Crude Oil Price Today : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी नरमी देखने को मिली है। ईरान-इजराइल तनाव और युद्ध की आशंकाओं के दौरान बढ़ी कीमतें अब लगभग युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आई हैं। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल गुरुवार को करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के लगभग बराबर है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चा तेल सस्ता होने का फायदा आम उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिलेगा। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने के लिए अभी करीब ढाई महीने का इंतजार करना पड़ सकता है।

ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद हालात में सुधार आया है। 17 जून को दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने लगी। इस फैसले का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर देखने को मिला, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। पहले जहां युद्ध की आशंका के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी, वहीं अब स्थिति सामान्य होने लगी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में होर्मुज मार्ग से लगभग 80 तेल टैंकर गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या अभी भी युद्ध से पहले प्रतिदिन गुजरने वाले 100 से अधिक जहाजों से कम है, लेकिन इसमें लगातार सुधार हो रहा है। जहाजों की आवाजाही बढ़ने से वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बेहतर हुई है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना और दाम घटकर फिर 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए।

फिर भी पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता क्यों नहीं होगा?

Crude Oil News Today आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है तो पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत क्यों नहीं घट रहे। इसका जवाब तेल की खरीद और सप्लाई की पूरी प्रक्रिया में छिपा है। एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा बताते हैं कि वर्तमान में देश में जो पेट्रोल और डीजल बिक रहा है, वह उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसे कई सप्ताह पहले काफी ऊंचे दामों पर खरीदा गया था। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि भारतीय रिफाइनरियों के लिए इसकी प्रभावी लागत लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

72 डॉलर वाला तेल पेट्रोल पंप तक पहुंचने में लगते हैं 75 से 80 दिन

India Petrol Diesel Price Update कच्चा तेल खरीदने से लेकर पेट्रोल पंप तक ईंधन पहुंचने की प्रक्रिया लंबी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल पहले निर्यातक देशों के बंदरगाहों तक पहुंचता है, जहां उसे जहाजों में लोड करने में 15 से 20 दिन का समय लगता है। इसके बाद समुद्री रास्ते से भारत पहुंचने में लगभग 55 से 60 दिन लग जाते हैं। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद तेल को रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहां उसकी प्रोसेसिंग कर पेट्रोल और डीजल तैयार किया जाता है। इसके बाद यह ईंधन विभिन्न डिपो और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है। पूरी प्रक्रिया में कुल 75 से 80 दिन का समय लग जाता है।

क्या ढाई महीने बाद तुरंत सस्ते हो जाएंगे पेट्रोल-डीजल?

Iran War Oil Prices विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होना आसान नहीं है। वजह यह है कि तेल विपणन कंपनियों को पिछले महंगे कच्चे तेल की खरीद के कारण अभी भी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार, वर्तमान समय में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा सरकार पहले ही एक्साइज ड्यूटी में करीब 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर चुकी है। ऐसे में कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई करने की कोशिश करेंगी, उसके बाद ही उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

कब तक मिल सकती है राहत?

When Will Petrol Prices Fall एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और कोई नया भू-राजनीतिक संकट पैदा नहीं होता, तो अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत के संकेत मिल सकते हैं। हालांकि व्यापक स्तर पर कीमतों में कमी आने की संभावना दशहरे के आसपास अधिक मानी जा रही है। यदि बाजार की स्थिति स्थिर रही तो त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

क्या फिर बढ़ सकते हैं कच्चे तेल के दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आने की संभावना काफी कम है। वैश्विक बाजार में आपूर्ति की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और ईरान से तेल निर्यात बढ़ने के कारण कीमतों पर नियंत्रण बना हुआ है। हालांकि, ऊर्जा बाजार हमेशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करता है। यदि भविष्य में किसी नए अंतरराष्ट्रीय तनाव, युद्ध या उत्पादन में बड़ी कटौती जैसी स्थिति पैदा होती है, तभी कीमतों में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ रहा है और विशेषज्ञों को निकट भविष्य में बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका नहीं दिख रही है।

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